प्रेगनेंसी नहीं हो रही अथवा गर्भधारण नहीं हो रहा है तो क्या करें? गर्भ ठहरने के 10 जरूरी उपाय, कारण, जाँच और इलाज – डॉ. नलिनी गुप्ता

हर विवाहित दंपती का सपना होता है कि उनके घर में एक स्वस्थ बच्चे की किलकारी गूँजे। लेकिन जब कई महीनों तक प्रयास करने के बाद भी गर्भधारण नहीं होता, तो मन में चिंता होने लगती है। कई महिलाएँ सोचने लगती हैं कि शायद उनके शरीर में कोई कमी है। कुछ परिवारों में महिला को दोष दिया जाता है, जबकि वास्तविकता यह है कि गर्भधारण में देरी के पीछे महिला, पुरुष, दोनों या कभी-कभी कोई स्पष्ट कारण न मिलने जैसी स्थितियाँ हो सकती हैं।
सबसे जरूरी बात यह है कि गर्भधारण नहीं हो रहा है, तो घबराने के बजाय सही कारण जानना चाहिए। केवल घरेलू नुस्खों, महँगी दवाओं या दूसरों की सलाह पर निर्भर रहने से समस्या का समाधान नहीं होता। सही समय पर उचित जाँच और उपचार से बहुत से दंपती माता-पिता बनने का सपना पूरा कर सकते हैं।
इस लेख में डॉ. नलिनी गुप्ता के मार्गदर्शन के लिए तैयार जानकारी के माध्यम से समझेंगे कि गर्भधारण में देरी क्यों होती है, महिला और पुरुष को कौन-कौन सी जाँच करानी चाहिए तथा गर्भधारण की संभावना बढ़ाने के लिए कौन-से 10 उपाय अपनाए जा सकते हैं।

1. गर्भधारण नहीं होने का क्या अर्थ है?
जब महिला और पुरुष नियमित रूप से बिना किसी गर्भनिरोधक उपाय के संबंध बनाते हैं, लेकिन गर्भधारण नहीं होता, तो इसे चिकित्सकीय दृष्टि से समझने की आवश्यकता होती है।
आमतौर पर निम्न स्थितियों में प्रजनन संबंधी जाँच शुरू कराने की सलाह दी जाती है:
- महिला की उम्र 35 वर्ष से कम है: एक वर्ष तक नियमित प्रयास करने के बाद भी गर्भधारण न हो।
- महिला की उम्र 35 से 39 वर्ष है: छह महीने तक प्रयास करने के बाद भी गर्भधारण न हो।
- महिला की उम्र 40 वर्ष या उससे अधिक है: बिना अनावश्यक देरी के स्त्री रोग विशेषज्ञ या प्रजनन विशेषज्ञ से सलाह लें।
यदि महिला के मासिक धर्म अनियमित हैं, कई महीनों तक पीरियड नहीं आते, पहले श्रोणि में संक्रमण रहा है, फैलोपियन ट्यूब में समस्या है, बार-बार गर्भपात हुआ है या पुरुष की जाँच में शुक्राणुओं की कमी सामने आई है, तो निर्धारित समय तक प्रतीक्षा करना आवश्यक नहीं है।
ध्यान रखें, गर्भधारण में देरी का अर्थ यह नहीं है कि अब बच्चा नहीं हो सकता। इसका अर्थ है कि कारण की पहचान करने के लिए उचित चिकित्सकीय मूल्यांकन की जरूरत हो सकती है।
2. गर्भधारण नहीं होने के प्रमुख कारण क्या हैं?
गर्भधारण के लिए महिला के अंडाशय से अंडा निकलना, पुरुष के शुक्राणु का अंडे तक पहुँचना, निषेचन होना और निषेचित अंडे का गर्भाशय में स्थापित होना जरूरी है। इस प्रक्रिया के किसी भी चरण में परेशानी होने पर गर्भधारण में देरी हो सकती है।
महिलाओं में गर्भधारण में देरी के कारण
- अंडा समय पर नहीं बनना या न निकलना
कुछ महिलाओं में हर महीने अंडा नहीं निकलता। इसे अंडोत्सर्जन संबंधी समस्या कहा जाता है। अनियमित मासिक धर्म, पीसीओएस, थायरॉइड की गड़बड़ी और कुछ हार्मोन संबंधी समस्याएँ इसके कारण हो सकती हैं।
- पीसीओएस की समस्या
पीसीओएस में अंडाशय की कार्यप्रणाली और हार्मोन प्रभावित हो सकते हैं। इसके कारण पीरियड अनियमित होना, चेहरे पर अधिक बाल आना, मुहाँसे या वजन बढ़ना जैसी समस्याएँ दिखाई दे सकती हैं। कुछ महिलाओं में अंडा नियमित रूप से नहीं निकलता, जिससे गर्भधारण में देरी हो सकती है।
हालाँकि, पीसीओएस होने का अर्थ यह नहीं है कि महिला गर्भधारण नहीं कर सकती। सही मूल्यांकन और उपचार से अनेक महिलाएँ गर्भधारण करती हैं।
- फैलोपियन ट्यूब में रुकावट
फैलोपियन ट्यूब अंडाशय से निकले अंडे और शुक्राणु के मिलने के लिए महत्वपूर्ण रास्ता है। यदि ट्यूब बंद हो, क्षतिग्रस्त हो या उसमें संक्रमण के कारण बदलाव आ गए हों, तो गर्भधारण में परेशानी हो सकती है।
- गर्भाशय से जुड़ी समस्याएँ
गर्भाशय में कुछ प्रकार की गाँठें, पॉलीप, जन्म से मौजूद बनावट संबंधी समस्याएँ या अंदरूनी परत से संबंधित विकार गर्भधारण अथवा गर्भ को बनाए रखने पर असर डाल सकते हैं। हर गाँठ या पॉलीप का उपचार जरूरी नहीं होता; निर्णय उसके आकार, स्थान और लक्षणों के अनुसार लिया जाता है।
- थायरॉइड और अन्य हार्मोन संबंधी समस्याएँ
थायरॉइड हार्मोन की गड़बड़ी और प्रोलैक्टिन हार्मोन का बढ़ना कुछ महिलाओं में अंडोत्सर्जन को प्रभावित कर सकता है। इसलिए लक्षणों और चिकित्सकीय इतिहास के अनुसार इनकी जाँच की जाती है।
पुरुषों में गर्भधारण में देरी के कारण
पुरुष की प्रजनन क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी महिला की। गर्भधारण न होने पर केवल महिला की जाँच कराना पर्याप्त नहीं है।
पुरुषों में प्रमुख कारण हैं:
- शुक्राणुओं की संख्या कम होना।
- शुक्राणुओं की गति कम होना।
- शुक्राणुओं का आकार या बनावट सामान्य से अलग होना।
- वीर्य में शुक्राणु बिल्कुल न मिलना।
- अंडकोष में नसों का फूलना, जिसे वैरिकोसील कहते हैं।
- हार्मोन संबंधी समस्या।
- अंडकोष में पुरानी चोट, संक्रमण या कुछ प्रकार की शल्यक्रियाओं का इतिहास।
- धूम्रपान, तंबाकू, अत्यधिक शराब, कुछ दवाएँ या बाहरी टेस्टोस्टेरोन का उपयोग।
- कभी-कभी आनुवंशिक कारण या शुक्राणु बनने की प्रक्रिया में गड़बड़ी।
कई बार महिला और पुरुष दोनों की जाँच सामान्य आती है, फिर भी गर्भधारण में देरी होती है। ऐसी स्थिति को अस्पष्ट कारणों से होने वाली बाँझपन की समस्या कहा जा सकता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि उपचार की कोई संभावना नहीं है।
3. गर्भधारण के लिए महिला की उम्र क्यों महत्वपूर्ण है?
महिला की उम्र गर्भधारण की संभावना को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में से एक है। जन्म के समय अंडाशय में अंडों का एक सीमित भंडार होता है। उम्र बढ़ने के साथ अंडों की संख्या और उनकी आनुवंशिक गुणवत्ता में कमी आती जाती है।
- 20 से 29 वर्ष: सामान्यतः प्रजनन क्षमता अच्छी रहती है, हालाँकि व्यक्तिगत अंतर होते हैं।
- 30 से 34 वर्ष: कई महिलाएँ आसानी से गर्भधारण करती हैं, लेकिन समय के साथ प्रजनन क्षमता में धीरे-धीरे कमी आ सकती है।
- 35 से 39 वर्ष: अंडों की संख्या और गुणवत्ता में गिरावट अधिक महत्वपूर्ण होने लगती है। गर्भपात और गुणसूत्र संबंधी समस्याओं का जोखिम भी बढ़ सकता है।
- 40 वर्ष या उससे अधिक: प्राकृतिक गर्भधारण की संभावना कम हो जाती है और गर्भपात का जोखिम बढ़ता है। इसलिए शीघ्र विशेषज्ञ सलाह उपयोगी है।
ये आयु वर्ग सामान्य जानकारी के लिए हैं, किसी व्यक्ति की गर्भधारण क्षमता का निश्चित अनुमान नहीं। कम उम्र की महिला को भी प्रजनन संबंधी समस्या हो सकती है और अधिक उम्र की कुछ महिलाएँ भी गर्भधारण करती हैं।
पुरुषों की उम्र बढ़ने से भी शुक्राणुओं की गुणवत्ता और कुछ प्रजनन परिणाम प्रभावित हो सकते हैं, हालाँकि इसका प्रभाव महिला की उम्र से अलग होता है।
महत्वपूर्ण सलाह: यदि महिला की उम्र 35 वर्ष से अधिक है और गर्भधारण में परेशानी हो रही है, तो केवल खान-पान बदलकर या घरेलू उपाय अपनाकर कई महीने प्रतीक्षा न करें। उचित जाँच समय पर कराना अधिक उपयोगी है।
4. पति के शुक्राणुओं में कमी हो तो क्या करें?
यदि कई महीनों से गर्भधारण नहीं हो रहा, तो पुरुष की वीर्य जाँच कराना एक महत्वपूर्ण शुरुआती कदम है। इस जाँच को वीर्य विश्लेषण या सीमन एनालिसिस कहा जाता है।
इसमें मुख्य रूप से देखा जाता है:
शुक्राणुओं की संख्या: वीर्य के एक मिलीलीटर में कितने शुक्राणु मौजूद हैं और कुल वीर्य में उनकी संख्या कितनी है।
शुक्राणुओं की गति: कितने शुक्राणु आगे की दिशा में प्रभावी ढंग से आगे बढ़ रहे हैं। अंडे तक पहुँचने के लिए गति महत्वपूर्ण होती है।
शुक्राणुओं की बनावट: शुक्राणुओं का आकार और संरचना कैसी है। इसकी जाँच निर्धारित मानकों के अनुसार की जाती है।
वीर्य की मात्रा और अन्य विशेषताएँ: वीर्य की मात्रा, गाढ़ापन और आवश्यकतानुसार दूसरी विशेषताओं का आकलन किया जाता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के संदर्भ मानकों के अनुसार, वीर्य में शुक्राणुओं की सांद्रता का निचला संदर्भ मान लगभग 1.6 करोड़ प्रति मिलीलीटर और कुल शुक्राणुओं की संख्या लगभग 3.9 करोड़ प्रति स्खलन है। ये केवल संदर्भ मान हैं, गर्भधारण होने या न होने की निश्चित सीमा नहीं। संख्या सामान्य होने पर भी दूसरी समस्याएँ हो सकती हैं और कम संख्या होने पर भी प्राकृतिक गर्भधारण संभव हो सकता है।
शुक्राणुओं की संख्या कम आने पर क्या करें?
- रिपोर्ट किसी पुरुष प्रजनन विशेषज्ञ या मूत्र रोग विशेषज्ञ को दिखाएँ।
- जरूरत पड़ने पर वीर्य जाँच दोबारा कराएँ, क्योंकि परिणाम में स्वाभाविक बदलाव हो सकता है।
- धूम्रपान, तंबाकू और नशीले पदार्थों से बचें।
- स्वस्थ वजन बनाए रखें, संतुलित भोजन करें और पर्याप्त नींद लें।
- यदि वैरिकोसील, हार्मोन संबंधी गड़बड़ी या अन्य उपचार योग्य कारण हो, तो उसका उपचार कराएँ।
- बिना चिकित्सकीय सलाह के टेस्टोस्टेरोन इंजेक्शन, हार्मोन या शुक्राणु बढ़ाने वाले पूरक न लें।
एक बहुत जरूरी बात: बाहर से लिया गया टेस्टोस्टेरोन और कुछ प्रकार के हार्मोन पुरुष के शरीर में शुक्राणु बनने की प्रक्रिया को बहुत कम कर सकते हैं, यहाँ तक कि शुक्राणु अस्थायी रूप से गायब भी हो सकते हैं। इसलिए बच्चा चाहने वाले पुरुष को ऐसे उपचार बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं लेने चाहिए।
यदि शुक्राणु बहुत कम हों या बिल्कुल न हों, तो चिकित्सक हार्मोन जाँच, अंडकोष की जाँच और आवश्यकता के अनुसार आनुवंशिक जाँच की सलाह दे सकते हैं। कुछ मामलों में दवाओं, शल्यक्रिया, शुक्राणु प्राप्त करने की प्रक्रिया, आईयूआई या आईवीएफ-आईसीएसआई जैसे उपचारों पर विचार किया जाता है।
5. गर्भधारण के लिए कौन-कौन सी जाँच करानी चाहिए?
जाँचों का उद्देश्य केवल बीमारी ढूँढ़ना नहीं, बल्कि यह समझना है कि गर्भधारण में परेशानी किस चरण पर आ रही है। हर दंपती को सभी जाँच कराने की जरूरत नहीं होती। चिकित्सक उम्र, मासिक धर्म, पिछली गर्भावस्थाओं, बीमारी के इतिहास और पुरुष की जाँच के अनुसार निर्णय लेते हैं।
महिलाओं के लिए जरूरी जाँचें
- श्रोणि का अल्ट्रासाउंड: इससे गर्भाशय, अंडाशय, अंडाशय में मौजूद छोटी थैलियों की संख्या और कुछ गाँठों या अन्य असामान्यताओं का पता लगाने में मदद मिलती है।
- थायरॉइड जाँच: रक्त में थायरॉइड प्रेरक हार्मोन की जाँच से थायरॉइड की कार्यप्रणाली का आकलन किया जाता है।
- प्रोलैक्टिन जाँच: यह जाँच विशेष रूप से तब उपयोगी हो सकती है, जब पीरियड अनियमित हों, कई महीनों से न आते हों या स्तनों से दूध जैसा स्राव होता हो।
- अंडोत्सर्जन की जाँच: मासिक धर्म के इतिहास, अंडोत्सर्जन जाँच पट्टी, अल्ट्रासाउंड या उपयुक्त समय पर रक्त में प्रोजेस्टेरोन की जाँच से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि अंडा निकल रहा है या नहीं।
- अंडों के भंडार की जाँच: एएमएच, एफएसएच और अल्ट्रासाउंड में अंडाशय के छोटे पुटकों की गिनती जैसी जाँच कुछ परिस्थितियों में उपयोगी होती हैं। इनसे उपचार की योजना बनाने में मदद मिलती है, लेकिन केवल इनकी रिपोर्ट से प्राकृतिक गर्भधारण की संभावना का निश्चित निर्णय नहीं किया जा सकता।
- फैलोपियन ट्यूब की जाँच: गर्भाशय और ट्यूब की बनावट तथा ट्यूब खुली है या नहीं, यह देखने के लिए विशेष प्रकार का एक्स-रे परीक्षण या अल्ट्रासाउंड आधारित परीक्षण किया जा सकता है।
- गर्भाशय की विशेष जाँच: यदि अल्ट्रासाउंड में कोई समस्या दिखाई दे या गर्भाशय के अंदर की बनावट को अधिक स्पष्ट देखना जरूरी हो, तो चिकित्सक अतिरिक्त जाँच सुझा सकते हैं।
पुरुषों के लिए जरूरी जाँचें
- वीर्य विश्लेषण: यह शुरुआती और सबसे महत्वपूर्ण जाँचों में से एक है।
- हार्मोन जाँच: शुक्राणुओं की संख्या बहुत कम हो या वीर्य में शुक्राणु न मिलें, तो आवश्यकता के अनुसार टेस्टोस्टेरोन, एफएसएच और अन्य हार्मोन की जाँच की जा सकती है।
- अंडकोष की शारीरिक जाँच: इससे वैरिकोसील, अंडकोष के आकार या अन्य समस्याओं का पता लगाने में मदद मिलती है।
- आनुवंशिक जाँच: कुछ गंभीर स्थितियों में चिकित्सक विशेष आनुवंशिक जाँच की सलाह दे सकते हैं। यह प्रत्येक पुरुष के लिए जरूरी नहीं है।
- अतिरिक्त जाँचें: विशेष परिस्थिति में अल्ट्रासाउंड या अन्य जाँच की जा सकती हैं।
याद रखें, सही तरीका यह है कि पति और पत्नी दोनों की जाँच लगभग एक ही समय पर शुरू की जाए, ताकि किसी एक की जाँच सामान्य आने पर दूसरे की जाँच में अनावश्यक देरी न हो।
6. गर्भधारण के लिए उपचार कैसे किया जाता है?
उपचार का चुनाव समस्या के कारण, महिला की उम्र, शुक्राणुओं की स्थिति, ट्यूब की खुलावट और दंपती की प्राथमिकताओं पर निर्भर करता है।
अंडा नहीं निकल रहा हो: यदि पीसीओएस या किसी अन्य कारण से अंडोत्सर्जन नहीं हो रहा, तो चिकित्सक निगरानी के साथ अंडा निकलने की दवा दे सकते हैं। कुछ दवाओं के साथ अल्ट्रासाउंड द्वारा निगरानी जरूरी होती है। स्वयं से दवा लेना सुरक्षित नहीं है।
थायरॉइड या हार्मोन की समस्या हो: उचित जाँच के बाद संबंधित समस्या का उपचार किया जाता है। इससे अंडोत्सर्जन और प्रजनन स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है।
फैलोपियन ट्यूब में रुकावट हो: रुकावट के स्थान और गंभीरता के आधार पर उपचार तय होता है। कुछ स्थितियों में शल्यक्रिया पर विचार किया जाता है, जबकि अन्य में परखनली निषेचन अधिक उपयुक्त हो सकता है।
शुक्राणुओं की कमी हो: कारण के अनुसार हार्मोन उपचार, कुछ मामलों में वैरिकोसील का उपचार या प्रजनन तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है। हर प्रकार की शुक्राणु कमी का उपचार एक जैसा नहीं होता।
गर्भाशय में समस्या हो: यदि कोई पॉलीप या अन्य असामान्यता गर्भधारण को प्रभावित कर रही हो, तो उपयुक्त स्थिति में उसका उपचार किया जा सकता है।
आईयूआई यानी गर्भाशय के भीतर शुक्राणु पहुँचाने की प्रक्रिया: इसमें तैयार किए गए शुक्राणुओं को उचित समय पर गर्भाशय में पहुँचाया जाता है। यह कुछ चुनिंदा स्थितियों में उपयोगी है, लेकिन गंभीर शुक्राणु कमी या दोनों ट्यूब बंद होने जैसी परिस्थितियों में उपयुक्त नहीं हो सकती।
आईवीएफ यानी परखनली निषेचन: इसमें अंडे और शुक्राणु को शरीर के बाहर मिलाकर भ्रूण तैयार किया जाता है और फिर उसे गर्भाशय में स्थापित किया जाता है।
आईसीएसआई यानी अंडे में एक शुक्राणु डालने की प्रक्रिया: यह आईवीएफ की एक तकनीक है, जिसमें चुने गए एक शुक्राणु को अंडे के भीतर डाला जाता है। कुछ प्रकार की गंभीर पुरुष प्रजनन समस्याओं में इसका उपयोग किया जाता है।
इनमें से किसी उपचार की सफलता की गारंटी नहीं होती। सही विकल्प चुनने के लिए विशेषज्ञ से व्यक्तिगत सलाह लेना आवश्यक है।
गर्भधारण के लिए 10 जरूरी उपाय
उपाय 1. मासिक धर्म की तारीख और अंडा निकलने का समय समझें
गर्भधारण के लिए सबसे महत्वपूर्ण बातों में से एक है सही समय पर संबंध बनाना। महिला के पूरे महीने गर्भधारण की संभावना समान नहीं रहती। अंडा निकलने के आसपास के दिनों में संभावना अधिक होती है।
यदि मासिक धर्म का चक्र 28 दिनों का है, तो अंडा अक्सर अगले पीरियड से लगभग 14 दिन पहले निकलता है। लेकिन प्रत्येक महिला में ऐसा बिल्कुल एक ही दिन हो, यह जरूरी नहीं है।
उदाहरण के लिए, यदि पीरियड 1 तारीख को शुरू हुआ और चक्र नियमित रूप से 28 दिनों का है, तो लगभग 14वें दिन अंडा निकल सकता है। फिर भी वास्तविक समय आगे-पीछे हो सकता है।
अंडा निकलने से पहले के पाँच दिन और अंडा निकलने का दिन गर्भधारण की संभावना वाले प्रमुख दिन माने जाते हैं। इन दिनों में हर एक या दो दिन में संबंध बनाना उपयोगी हो सकता है। <Cite refs={[“turn677004search3”]}/>
यदि पीरियड अनियमित हैं, तो केवल कैलेंडर के आधार पर अंडा निकलने का दिन तय करना मुश्किल हो सकता है। ऐसी स्थिति में चिकित्सक की सलाह या अंडोत्सर्जन जाँच पट्टी मदद कर सकती है।
उपाय 2. संबंध बनाने की सही आवृत्ति रखें
कुछ दंपती सोचते हैं कि शुक्राणुओं को अधिक समय तक बचाकर रखने के लिए कई दिनों तक संबंध नहीं बनाना चाहिए। लेकिन प्राकृतिक गर्भधारण के लिए उपजाऊ दिनों में हर एक या दो दिन में संबंध बनाना एक व्यावहारिक तरीका है।
यदि अंडा निकलने का समय पता नहीं चलता, तो पूरे मासिक चक्र में हर दो से तीन दिन में संबंध बनाना भी उपयोगी हो सकता है।
किसी एक विशेष दिन को लेकर अत्यधिक दबाव न बनाएँ। संबंध बनाने में सहजता, आपसी सहमति और मानसिक शांति भी महत्वपूर्ण हैं।
संबंध बनाने के बाद लंबे समय तक लेटे रहना, पैर ऊपर उठाना या किसी विशेष मुद्रा में रहना गर्भधारण के लिए आवश्यक साबित नहीं हुआ है।
उपाय 3. उम्र के अनुसार समय पर विशेषज्ञ से मिलें
यदि महिला की उम्र 35 वर्ष से कम है और एक वर्ष तक नियमित प्रयास के बाद भी गर्भधारण नहीं हुआ, तो जाँच कराएँ। यदि उम्र 35 वर्ष या उससे अधिक है, तो छह महीने बाद जाँच शुरू कराना उचित है। 40 वर्ष से अधिक उम्र में जल्द सलाह लें।
यदि पीरियड बहुत अनियमित हैं, ट्यूब संबंधी बीमारी का इतिहास है, पुरुष के शुक्राणुओं की कमी ज्ञात है या पहले से कोई प्रजनन संबंधी समस्या है, तो एक वर्ष प्रतीक्षा न करें।
समय पर जाँच कराने का फायदा यह है कि उपचार योग्य कारण जल्दी सामने आ सकता है और उम्र से जुड़ी प्रजनन क्षमता में गिरावट को ध्यान में रखकर योजना बनाई जा सकती है।
उपाय 4. दोनों पति-पत्नी की जाँच कराएँ
गर्भधारण नहीं होने पर केवल महिला को दवाएँ देना उचित तरीका नहीं है। पुरुष के शुक्राणुओं की संख्या, गति और बनावट की जाँच भी शुरुआती मूल्यांकन का हिस्सा होनी चाहिए।
महिला के लिए मासिक धर्म का इतिहास, अंडोत्सर्जन, गर्भाशय और ट्यूब की स्थिति का आकलन किया जा सकता है। पुरुष के लिए वीर्य विश्लेषण और जरूरत पड़ने पर अन्य जाँच की जाती हैं।
यदि पहली वीर्य जाँच असामान्य हो, तो चिकित्सक दोबारा जाँच की सलाह दे सकते हैं। एक रिपोर्ट के आधार पर हमेशा अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जाता।
दोनों की जाँच साथ शुरू करने से सही कारण पहचानने और उचित उपचार चुनने में मदद मिलती है।
उपाय 5. संतुलित भोजन करें और वजन का ध्यान रखें
बहुत कम वजन और अत्यधिक वजन, दोनों ही कुछ महिलाओं में अंडोत्सर्जन और गर्भधारण को प्रभावित कर सकते हैं। पुरुषों में भी मोटापा हार्मोन और शुक्राणुओं की गुणवत्ता पर असर डाल सकता है।
अपने भोजन में दालें, चना, राजमा, हरी सब्जियाँ, मौसमी फल, साबुत अनाज, दूध या अन्य उपयुक्त प्रोटीन स्रोत और मेवे शामिल करें। भोजन का चुनाव अपनी स्वास्थ्य स्थिति, बजट और पोषण संबंधी जरूरतों के अनुसार करें।
केवल अनार, बादाम, खजूर, दूध या किसी एक खास खाद्य पदार्थ से गर्भधारण होने का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इनका संतुलित आहार में स्थान हो सकता है, लेकिन ये प्रजनन संबंधी बीमारी का इलाज नहीं हैं।
यदि वजन अधिक है, तो धीरे-धीरे स्वस्थ वजन की ओर बढ़ना उपयोगी हो सकता है। अत्यधिक उपवास, अचानक वजन घटाने वाली योजनाएँ या बहुत कम खाना शुरू न करें।
उपाय 6. फोलिक अम्ल लें और गर्भधारण से पहले स्वास्थ्य की तैयारी करें
गर्भधारण की योजना बना रही महिलाओं को आमतौर पर प्रतिदिन 400 माइक्रोग्राम फोलिक अम्ल लेने की सलाह दी जाती है। इसे गर्भधारण से कम से कम एक महीने पहले शुरू करना उपयोगी है और गर्भावस्था की शुरुआत में इसे जारी रखा जाता है।
फोलिक अम्ल बच्चे में मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी से संबंधित कुछ जन्मजात समस्याओं का जोखिम कम करने में मदद करता है। यह गर्भधारण कराने वाली दवा नहीं है।
कुछ महिलाओं को विशेष परिस्थितियों में अधिक मात्रा की आवश्यकता हो सकती है, लेकिन इसकी खुराक चिकित्सक तय करें। स्वयं से अधिक मात्रा न लें।
गर्भधारण से पहले मधुमेह, थायरॉइड, रक्तचाप और नियमित रूप से ली जाने वाली दवाओं की समीक्षा भी कराएँ। कुछ दवाओं को बदलने की जरूरत हो सकती है, लेकिन उन्हें स्वयं बंद न करें।
उपाय 7. धूम्रपान, तंबाकू और शराब से बचें
धूम्रपान और तंबाकू महिला तथा पुरुष दोनों की प्रजनन क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। शराब का सेवन भी स्वास्थ्य और गर्भधारण की योजना को प्रभावित कर सकता है।
यदि पति धूम्रपान करते हैं, तो उन्हें भी इसे छोड़ने का प्रयास करना चाहिए। केवल महिला से सभी सावधानियों की अपेक्षा करना सही नहीं है।
गर्भावस्था की योजना बनाते समय महिला के लिए शराब से पूरी तरह बचना सबसे सुरक्षित विकल्प है। पुरुष भी धूम्रपान, नशीले पदार्थों और अत्यधिक शराब से दूर रहें।
यदि किसी को नशे की आदत छोड़ने में परेशानी हो, तो चिकित्सकीय सहायता लेना उपयोगी है।
उपाय 8. नींद, तनाव और शारीरिक गतिविधि पर ध्यान दें
गर्भधारण में देरी के दौरान तनाव होना स्वाभाविक है। हर महीने पीरियड आने पर निराशा और परिवार के सवालों का दबाव मानसिक थकान बढ़ा सकता है।
लेकिन यह मानना गलत है कि केवल तनाव के कारण गर्भधारण नहीं हो रहा। प्रजनन संबंधी समस्याओं के पीछे चिकित्सकीय कारण भी हो सकते हैं, इसलिए तनाव कम करने के साथ उचित जाँच भी जरूरी है।
प्रतिदिन पर्याप्त नींद लें, नियमित रूप से टहलें, अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम करें और मन को आराम देने वाली गतिविधियों के लिए समय निकालें।
बहुत अधिक व्यायाम, अत्यधिक कैलोरी की कमी या शरीर पर जरूरत से ज्यादा दबाव डालने से कुछ महिलाओं में मासिक धर्म प्रभावित हो सकता है। इसलिए संतुलित दिनचर्या अपनाएँ।
उपाय 9. घरेलू नुस्खों और बिना सलाह वाली दवाओं से बचें
इंटरनेट पर कई बार दावा किया जाता है कि दालचीनी, अजवाइन, मेथी, किसी खास काढ़े या विशेष जड़ी-बूटी से गर्भधारण निश्चित हो जाता है। ऐसे दावों के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं।
कुछ जड़ी-बूटियाँ दवाओं के साथ प्रतिक्रिया कर सकती हैं या गर्भावस्था की शुरुआत में नुकसान पहुँचा सकती हैं। इसलिए गर्भधारण की योजना बनाते समय किसी भी औषधीय चूर्ण, जड़ी-बूटी या पूरक का सेवन चिकित्सक से पूछकर करें।
इसी तरह, अंडा निकलने की दवाएँ, प्रोजेस्टेरोन, हार्मोन इंजेक्शन या पुरुषों के लिए टेस्टोस्टेरोन बिना सलाह के लेना उचित नहीं है।
यदि पीसीओएस, थायरॉइड, ट्यूब में रुकावट या शुक्राणुओं की कमी जैसी समस्या है, तो उसका उपचार कारण के अनुसार होना चाहिए। घरेलू नुस्खे आवश्यक चिकित्सा का विकल्प नहीं हैं।
उपाय 10. सही समय पर प्रजनन विशेषज्ञ से उपचार लें
यदि उचित समय तक प्रयास करने पर भी गर्भधारण नहीं हुआ, तो स्त्री रोग विशेषज्ञ या प्रजनन विशेषज्ञ से मिलें। पुरुष की समस्या होने पर पुरुष प्रजनन विशेषज्ञ या मूत्र रोग विशेषज्ञ की सलाह भी आवश्यक हो सकती है।
विशेषज्ञ आपकी उम्र, कितने समय से प्रयास कर रहे हैं, मासिक धर्म की स्थिति, पुरानी बीमारियों और दोनों की जाँच के आधार पर उपचार की योजना बनाएँगे।
किसी महिला को केवल अंडा निकलने की दवा से लाभ हो सकता है। किसी को ट्यूब की समस्या के लिए अलग उपचार चाहिए हो सकता है। कुछ दंपती प्राकृतिक प्रयास जारी रख सकते हैं, जबकि अन्य के लिए आईयूआई या आईवीएफ पर विचार करना उचित हो सकता है।
हर दंपती को आईवीएफ की आवश्यकता नहीं होती और न ही हर दंपती के लिए एक ही उपचार सही होता है। समय पर सही कारण जानना सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
7. गर्भधारण में देरी हो तो इन गलतियों से बचें
- केवल महिला को दोष न दें; पुरुष की जाँच भी जरूरी है।
- हर महीने बिना जाँच के नई दवा शुरू न करें।
- पीरियड अनियमित होने पर इसे सामान्य मानकर लंबे समय तक न टालें।
- केवल अंडों के भंडार की जाँच से गर्भधारण की पूरी संभावना तय न करें।
- किसी एक व्यक्ति की सफल गर्भावस्था देखकर वही दवा या उपचार न अपनाएँ।
- आईवीएफ को अंतिम असफलता न समझें और न ही इसे हर समस्या का पहला समाधान मानें।
- अपनी परेशानी के बारे में डॉक्टर से खुलकर बात करें, जिसमें संबंध बनाने में कठिनाई, दर्द या पुरुष की यौन समस्या भी शामिल है।
8. गर्भधारण नहीं होने पर डॉक्टर को कौन-सी जानकारी दें?
डॉक्टर के पास जाते समय ये बातें पहले से लिखकर ले जाना उपयोगी हो सकता है:
- महिला की उम्र और पिछले छह से बारह महीनों के पीरियड की तारीखें।
- कितने महीनों से गर्भधारण का प्रयास कर रहे हैं।
- पीरियड नियमित हैं या अनियमित।
- पहले कभी गर्भधारण, गर्भपात या गर्भाशय से जुड़ी कोई समस्या हुई है या नहीं।
- पहले की अल्ट्रासाउंड, हार्मोन और अन्य जाँचों की रिपोर्ट।
- पति की वीर्य जाँच की रिपोर्ट, यदि उपलब्ध हो।
- दोनों द्वारा ली जा रही दवाओं और पूरकों की सूची।
- पहले हुए संक्रमण, शल्यक्रिया या किसी पुरानी बीमारी की जानकारी।
इन जानकारियों से चिकित्सक को जाँच और उपचार की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1. गर्भधारण नहीं हो रहा है तो सबसे पहले क्या करना चाहिए?
सबसे पहले महिला की उम्र, मासिक धर्म की नियमितता और कितने समय से गर्भधारण का प्रयास किया जा रहा है, यह समझें। महिला की उम्र 35 वर्ष से कम हो तो सामान्यतः एक वर्ष के प्रयास के बाद, 35 वर्ष या अधिक हो तो छह महीने के बाद जाँच करानी चाहिए। यदि पहले से कोई समस्या है, तो जल्द विशेषज्ञ से मिलें। पति की वीर्य जाँच भी कराना जरूरी हो सकता है।
प्रश्न 2. पीरियड नियमित आते हैं, फिर भी गर्भधारण क्यों नहीं हो रहा?
नियमित पीरियड आने का अर्थ यह नहीं है कि प्रजनन से जुड़ी सभी चीजें सामान्य हैं। शुक्राणुओं की कमी, फैलोपियन ट्यूब में रुकावट, गर्भाशय की कुछ समस्याएँ या उम्र से संबंधित कारण भी गर्भधारण में देरी कर सकते हैं। इसलिए जरूरत के अनुसार दोनों की जाँच करानी चाहिए।
प्रश्न 3. क्या पति के शुक्राणु कम होने पर बच्चा हो सकता है?
हाँ, कुछ मामलों में शुक्राणुओं की संख्या कम होने पर भी प्राकृतिक गर्भधारण संभव है। संभावना संख्या के साथ-साथ शुक्राणुओं की गति, बनावट, महिला की उम्र और अन्य कारकों पर निर्भर करती है। कारण के अनुसार उपचार, आईयूआई, आईवीएफ या आईसीएसआई जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।
प्रश्न 4. गर्भधारण के लिए संबंध कब बनाना चाहिए?
अंडा निकलने से पहले के पाँच दिन और अंडा निकलने का दिन गर्भधारण की संभावना वाले प्रमुख दिन होते हैं। इस अवधि में हर एक या दो दिन में संबंध बनाना उपयोगी हो सकता है। यदि अंडा निकलने का दिन पता नहीं चलता, तो पूरे चक्र में हर दो से तीन दिन में संबंध बनाना भी एक अच्छा तरीका है।
प्रश्न 5. क्या पीसीओएस होने पर गर्भधारण नहीं हो सकता?
नहीं। पीसीओएस होने का अर्थ यह नहीं है कि गर्भधारण असंभव है। कुछ महिलाओं में अंडा नियमित रूप से नहीं निकलता, लेकिन जीवनशैली में उचित बदलाव और जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय उपचार से गर्भधारण संभव हो सकता है। उपचार महिला की उम्र, मासिक धर्म, अन्य जाँचों और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार तय किया जाता है।
प्रश्न 6. गर्भधारण के लिए कौन-सी दवा सबसे अच्छी है?
सभी महिलाओं के लिए एक ही दवा सही नहीं होती। अंडा निकलने में समस्या, हार्मोन संबंधी गड़बड़ी और अन्य कारणों का उपचार अलग-अलग हो सकता है। बिना जाँच के दवा लेने से अंडाशय में अधिक प्रतिक्रिया, एक से अधिक गर्भ ठहरने या अन्य दुष्प्रभावों का जोखिम हो सकता है। इसलिए दवा केवल चिकित्सक की सलाह से लें।
प्रश्न 7. क्या गर्भधारण नहीं होने पर सीधे आईवीएफ कराना चाहिए?
हर स्थिति में सीधे आईवीएफ की जरूरत नहीं होती। कुछ दंपती सही समय पर संबंध बनाने, जीवनशैली में बदलाव या अंडोत्सर्जन संबंधी समस्या के उपचार से गर्भधारण कर सकते हैं। कुछ स्थितियों में आईयूआई और कुछ में आईवीएफ अधिक उपयुक्त होता है। सही निर्णय जाँच के बाद लिया जाना चाहिए।
10. डॉ. नलिनी गुप्ता की ओर से अंतिम सलाह
गर्भधारण में देरी होने पर अपने शरीर को दोष न दें और न ही अपने साथी को। यह एक ऐसी समस्या है जिसमें दोनों का सहयोग और समझ जरूरी है।
सबसे पहले सही समय पर संबंध बनाने, संतुलित भोजन, स्वस्थ वजन, पर्याप्त नींद और तंबाकू से दूरी जैसे उपाय अपनाएँ। साथ ही, उम्र और प्रयास की अवधि के अनुसार जाँच कराने में देरी न करें।
महिला की उम्र, अंडोत्सर्जन, गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब की स्थिति के साथ पुरुष के शुक्राणुओं की संख्या, गति और बनावट को भी समझना आवश्यक है। जब वास्तविक कारण पता चलता है, तब उपचार अधिक सही दिशा में आगे बढ़ सकता है।
माता-पिता बनने की यात्रा हर दंपती के लिए अलग होती है। दूसरों से तुलना करने के बजाय सही जानकारी, उचित जाँच और विशेषज्ञ की सलाह पर भरोसा करें।
याद रखें: गर्भधारण में देरी का मतलब यह नहीं कि उम्मीद समाप्त हो गई है। सही समय पर जाँच और उचित उपचार से आगे का रास्ता स्पष्ट हो सकता है।
चिकित्सकीय अस्वीकरण
यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह व्यक्तिगत चिकित्सकीय जाँच, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। किसी भी दवा, हार्मोन या प्रजनन उपचार को शुरू करने से पहले योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।

